नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

🇮🇳 देश की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले Serving Armed Forces Personnel, Ex-Servicemen, JCOs, Naib Subedars से लेकर Agniveer तक—सभी के लिए यह खबर उम्मीद और भरोसे की नई किरण बनकर सामने आई है 🌟 अब सैनिकों को यह सोचकर चिंता करने की ज़रूरत नहीं कि सेवा या Agniveer कार्यकाल के बाद उनका भविष्य क्या होगा, क्योंकि रोजगार और पुनर्वास के मोर्चे पर उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा 💪 देश की सेवा में अनुशासन, त्याग और साहस दिखाने वाले ये योद्धा अब नागरिक जीवन में भी अधिकार, सम्मान और अवसर के साथ आगे बढ़ेंगे—क्योंकि वर्दी भले उतर जाए, लेकिन सम्मान और हक़ हमेशा कायम रहेंगे 🇮🇳🪖

📜 Lateral Induction का असली और कानूनी अर्थ

सरल शब्दों में कहें तो Lateral Induction केंद्र सरकार की एक बाध्यकारी नीति है, जिसके अंतर्गत वे Ex-Serviceman जिनके आयु 56years से कम हो और Serving Personnelजो अपनी सेवा के अंतिम एक वर्ष में हैं और जिनके पास निर्धारित योग्यता, प्रशिक्षण एवं अनुभव है, उन्हें Civil Posts पर Deputation के माध्यम से नियुक्त किया जा सकता है; इस दौरान वे अपनी सैन्य सेवा पूरी करते हैं और सेना से सेवानिवृत्ति के पश्चात वही नियुक्ति स्वतः Re-employment में परिवर्तित हो जाती है, जिससे सेवा समाप्त होते ही बेरोज़गारी की स्थिति पैदा न हो। यह नीति इसलिए बनाई गई है ताकि वर्षों का सैन्य अनुभव, अनुशासन और दक्षता देश की प्रशासनिक व्यवस्था में उपयोग हो सके। इसलिए किसी भी मंत्रालय, विभाग या स्वायत्त संस्था द्वारा यह कहना कि “अंतिम वर्ष में होने के कारण सैनिक को नियुक्त नहीं किया जा सकता”, न केवल नीति के विरुद्ध है बल्कि कानूनन भी अस्वीकार्य है ❌⚖️। Lateral Induction का मूल उद्देश्य यही है कि देश की सेवा करने वाले सैनिक सम्मान, सुरक्षा और निरंतर रोज़गार के अधिकार से वंचित न हों 🇮🇳✨

🔥 क्या हो रहा था अब तक?

केंद्र सरकार के लगभग सभी Ministries, Departments और Autonomous Bodies ने वर्षों तक DoPT के Lateral Induction एवं Deputation-cum-Re-employment नियमों को नज़रअंदाज़ करते हुए Armed Forces personnel को civil posts में अवसर देने से वंचित रखा, जिससे सैनिकों के साथ स्पष्ट अन्याय होता रहा। जो अधिकार लंबे समय से केवल फाइलों और सरकारी काग़ज़ों तक सीमित थे, वे अब अदालतों के सख़्त और निर्णायक आदेशों के बाद ज़मीन पर लागू होते हुए दिखाई देने लगे हैं, और यह बदलाव सैनिकों के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो रहा है ⚖️🇮🇳


🔍 समस्या क्या थी?

भारत सरकार ने वर्षों पहले यह नीति बनाई थी कि Ex-Servicemen एवें Service Armed Forces Personnel को उनके अंतिम सेवा वर्ष में Civil Government Posts पर Deputation-cum-Re-employmentLateral Induction के माध्यम से मौका दिया जाएगा। यह नीति DoPT की कई OMs (1985 से 2022 तक) में स्पष्ट रूप से मौजूद है। लेकिन हकीकत यह थी कि लगभाग सभी मंत्रालयों / विभागों / स्वायत्त संस्थानों ने इन आदेशों को भर्ती विज्ञापनों में शामिल नहीं किया और सैनिकों को “Not Eligible” बताकर बाहर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि ऑफिसर, JCO, NCO, Sepoy यहाँ तक कि अग्निवीर योग्य होते हुए भी नौकरी से वंचित कर दिए गए 😔


⚖️ अदालत ने क्या कहा?

Priyadarsan Pradhan vs Union of India मामले में माननीय ओडिशा हाईकोर्ट ने बेहद स्पष्ट और सख़्त शब्दों में कहा कि Lateral Induction कोई वैकल्पिक या इच्छाधीन नीति नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार की बाध्यकारी (Binding) नीति है। यह नीति सभी Ministries, Departments और Autonomous Bodies पर समान रूप से और अनिवार्य रूप से लागू होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि Armed Forces Personnel के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक है और DoPT को निर्देश दिया कि सैनिकों के साथ हो रहे इस भेदभाव को तत्काल समाप्त किया जाए, ताकि सेवा और बलिदान देने वालों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके ⚖️🇮🇳


🛑 CAT का बड़ा हस्तक्षेप

📅 18 दिसंबर 2025 — CAT, नई दिल्ली

Priyadarsan Pradhan vs Union of India मामले में Central Administrative Tribunal (CAT) ने भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक (Interim Protection) लगाते हुए बेहद अहम आदेश पारित किया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि भर्ती का परिणाम तथा आगे की पूरी प्रक्रिया, Tribunal के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। 👉 इसका सीधा और स्पष्ट संदेश है कि जो Ministries / Departments / Autonomous Bodies अब तक सैनिकों को नज़रअंदाज़ कर मनमानी कर रहे थे, वे अब ऐसा नहीं कर सकते। भर्ती प्रक्रिया अब न्यायिक निगरानी (Judicial Scrutiny) में है 👀⚖️ और Lateral Induction नीति को दरकिनार करना अब आसान नहीं रहेगा। 🇮🇳 यह आदेश Serving Armed Forces Personnel, Ex-Servicemen, JCOs, Naib Subedar से लेकर Agniveer तक—सभी के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत और ऐतिहासिक क़दम है।


🇮🇳 यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं है—यह न्याय और सम्मान का प्रश्न है

यह फैसला केवल एक पद या नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सैनिक के सम्मानउसके भविष्य की आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा, और राज्य के संवैधानिक दायित्व से जुड़ा हुआ है। यह निर्णय सरकार को यह याद दिलाता है कि वह एक Model Employer है, जिस पर अपने ही सशस्त्र बलों के कर्मियों के प्रति निष्पक्ष, संवेदनशील और समान व्यवहार करने की विशेष जिम्मेदारी है। 🔔 आगे की राह स्पष्ट है—अब समय आ गया है कि सभी मंत्रालय, विभाग और स्वायत्त संस्थाएँ तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएँ: 📢 Corrigendum जारी करें, ✔️ भर्ती प्रक्रियाओं में Lateral Induction को अनिवार्य रूप से शामिल करें, और ✔️ Serving एवं Ex-Armed Forces Personnel के साथ भेदभाव रहित, समान व्यवहार सुनिश्चित करें, ताकि देश की रक्षा करने वालों को सेवा के बाद अनिश्चितता नहीं, बल्कि सम्मानजनक भविष्य मिले 🇮🇳✨


🪖 देश के लिए पहले वर्दी पहनी — अब देश की जिम्मेदारी है कि भविष्य सुरक्षित करे 🇮🇳

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One thought on “⚖️ 21 विभागों पर लगी रोक — Armed Forces के Lateral Induction पर ऐतिहासिक मोड़ 🇮🇳”
  1. Well done, Military info, सही जानकारी तथ्यों के साथ। अभी जरूरत है, Retire होने वाले / ESM सभी जरूरत मन्द इस सुविधा का समय पर लाभ उठाएं, साथ में सभी को जागरूक भी करें।

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